Wednesday, February 4, 2009

मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूं

हर शख्स अपने साथ मैं खुशहाल कर सकूं
मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूं ।

फैली हैं अब समाज में अनगिन बुराइयाँ
है लालसा कि बद को मैं बेहाल कर सकूँ।

फेकूँ निकाल हिय के अन्धकार द्वेष को
कटुता के जी का आज मैं जंजाल कर सकूँ।

है प्रार्थना कि नाथ वृहद शक्ति दो हमें
चेहरा बुराइयों का मैं विकराल कर सकूँ ।

17 टिप्पणियाँ:

बहुत खूब भगवान आप को शक्ति देसुन्दर अभिव्यक्ति के लिये बधाई

February 4, 2009 4:25 PM  

फैली हैं अब समाज में अनगिन बुराइयाँ
है लालसा कि बद को मैं बेहाल कर सकूँ।

यही प्रार्थना है की या हो सके ...सुंदर लिखा आपने

February 4, 2009 5:12 PM  

nice poem again

February 4, 2009 5:15 PM  

Waah ! Pavitra sundar bhaav......ishwar awashy sune......

February 4, 2009 5:55 PM  

हर शख्स अपने साथ मैं खुशहाल कर सकूं
मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूं ............

आप अपने साथ हर शख्स को इतनी खूबसूरत कविताओं से खुश करने का कमाल तो कर ही लेते हैं।
ईश्वर आपको ऐसे अनगिनत कमाल करने की सामर्थ्य दे।

February 4, 2009 7:03 PM  

सदभावना !

February 4, 2009 9:03 PM  

काश आप की बात भगवान सुन ले, बहुत सुंदर कविता कही आप ने . धन्यवाद

February 4, 2009 10:27 PM  

हमारे लायक सेवा हो तो बताना जी !

February 4, 2009 10:48 PM  

क्या बात है ! शैली कुछ बदली हुयी है !
अच्छा लग रहा है !

February 7, 2009 9:56 AM  

है प्रार्थना कि नाथ वृहद शक्ति दो हमें
चेहरा बुराइयों का मैं विकराल कर सकूँ ।
himanshu ji sunder rachna ke liye badhai, chehra buraiyon ka main "vikral" kar sakun ki jagah "badhaal" ho to kaisa hai.

February 7, 2009 6:24 PM  

मैंने अपने ब्लॉग का पता बदल दिया है। मेरे ब्लॉग का नया पता है :-
http://hindisarita.blogspot.com

February 14, 2009 9:29 AM  

मैंने अपने ब्लॉग का पता बदल दिया है। मेरे ब्लॉग का नया पता है :-
http://hindisarita.blogspot.com

February 14, 2009 9:29 AM  

बहुत सुंदर कविता और उतने ही सुंदर भाव भी. ईश्वर आपकी इच्छा पूर्ण करे!

February 19, 2009 8:52 AM  

विचारोत्तेजक रचना. इंसान कोई भी कमाल कर सकता है. बस ईश्वर में विश्वास होना चाहिए.

February 28, 2009 6:00 PM  

अच्छी रचना, सुन्दर शब्दों में बांधा है इसको, अच्छी अभिव्यक्ति विचारोत्तेजक रचना

February 28, 2009 6:29 PM  

बहुत सुन्दर भाव हैं रचना के ............
पर मुझे इन पंक्तियों पर आपत्ति है ..............

है प्रार्थना कि नाथ वृहद शक्ति दो हमें
चेहरा बुराइयों का मैं विकराल कर सकूँ

इससे एक गलत सन्देश प्रसारित हो रहा है ...............मैं जानती हूँ की आपका मंतव्य ऐसा नहीं होगा ....
ऐसा कहने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ...........

March 1, 2009 9:48 AM  

बहुत सुंदर रचना ...
आप सबको होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...

March 10, 2009 6:37 PM  

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