Friday, January 30, 2009

आपका हँसना

आपके हँसने में
छ्न्द है
सुर है
राग है,
आपका हँसना एक गीत है।

आपके हँसने में
प्रवाह है
विस्तार है
शीतलता है,
आपका हँसना एक सरिता है।

आपके हँसने में
शन्ति है
श्रद्धा है
समर्पण है,
आपका हँसना एक भक्ति है।

आपके हँसने में
स्नेह है
प्रेम है
करुणा है,
आपका हँसना एक भाव-तीर्थ है।

आपके हँसने में
आपका विचार है
अस्तित्व है
रहस्य है,
आपका हँसना स्वयं आप हैं।

मेरे जीवन में
आपकी तरलता है
स्निग्धता है
सम्मोहन है,
मेरा जीना आपका हँसना है।

15 टिप्पणियाँ:

अब लीजिए मैं हंसता हूँ तो लोग कहते हैं की यार इतना हंसते क्यों हो. :)

January 30, 2009 3:57 PM  

मेरे जीवन में
आपकी तरलता है
स्निग्धता है
सम्मोहन है,
मेरा जीना आपका हँसना है।

बहुत बढिया!

January 30, 2009 4:02 PM  

मेरे जीवन में
आपकी तरलता है
स्निग्धता है
सम्मोहन है,
मेरा जीना आपका हँसना है।
बहुत बढिया!!

January 30, 2009 4:04 PM  

मेरे जीवन में
आपकी तरलता है
स्निग्धता है
सम्मोहन है,
मेरा जीना आपका हँसना है।

बढ़िया लगी यह

January 30, 2009 5:20 PM  

हँसने के ऊपर तो आपने बहुत अच्छी रचना लिख डाली ...


अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

January 30, 2009 5:24 PM  

waah bahutsundar

January 30, 2009 5:34 PM  

सुन्दर मनोभिव्यक्ति!

January 30, 2009 6:14 PM  

"मेरा जीना आपका हँसना है।" लाजवाब रचना. अब हम जैसे तो पुराने गानों से ही काम चलाएंगे - "जी चाहता है चूम लूँ तेरी नज़र को मैं" आभार.

January 30, 2009 6:22 PM  

aapne aachi kavita likhi hai.

January 30, 2009 9:49 PM  

बहुत सुंदर ...इसलिए हंसते रहना चाहिए्....पर लोग समझते ही नहीं।

January 31, 2009 12:03 AM  

हाँ मेरा हँसना ऐसा ही है :)

January 31, 2009 12:05 AM  

हिमाशु जी उनके हंसने मै हमारा फ़ंसना भी तो है.
बहुत सुंदर कविता लिखी.
धन्यवाद

January 31, 2009 12:32 AM  

बहुत खूब। हम मुस्करा रहे हैं।

January 31, 2009 8:20 AM  

वाह कितने आयामों से देखा आपने
मैं भी मुस्कुराते हुए टिपिया दूँ हिमांशु जी

February 1, 2009 7:48 AM  

another good poem nice choice of words

February 1, 2009 2:54 PM  

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