प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद 6
इस छ्लना में पड़ी रहूं
यदि तेरा कहना एक छलावा.
तेरे शब्द मूर्त हों नाचें
मैं उस थिरकन में खो जाऊं
तेरी कविता की थपकी से
मेरे प्रियतम मैं सो जाऊं
अधर हिलें मैं प्राण वार दूं
यदि उनका हिलना एक छलावा.
प्रिय तेरे इस भाव-जलधि में
मैं डूबी, बस डूबी जाऊं
तेरी रसना के बन्धन से
मैं असहज हो बंधती जाऊं
इन आंखों पर जग न्यौछावर
यदि इनका खुलना एक छ्लावा.
सारी चाह हुई है विस्मृत
केवल एक अभिप्सित तू है
प्रेम-उदधि मेरे प्राणेश्वर
मेरा हृदय-नृपति तो तू है
प्रतिक्षण मिलन-गीत ही गाऊं
यदि तेरा मिलना एक छलावा.
लेबल: कविता, प्रेम, प्रेम पत्र





Udan Tashtari said...
प्रतिक्षण मिलन-गीत ही गाऊं
यदि तेरा मिलना एक छलावा.
--क्या बात है-बेहतरीन प्रवाह, गहरे भाव, सुन्दर शिल्प. पूरी की पूरी तारीफ योग्य. बधाई.
January 20, 2009 6:42 AM
Arvind Mishra said...
तेरा मिलना एक छलावा -जीवन का यही यथार्थ है हिमांशु !
January 20, 2009 7:35 AM
विनय said...
बहुत स्पर्श करती है दिल को
---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम
January 20, 2009 8:06 AM
Amit said...
bahut acchi kavita....bilkul dil ko chooti hai...
January 20, 2009 11:27 AM
राज भाटिय़ा said...
बहुत सुंदर भाव , सुंदर कविता.
धन्यवाद
January 20, 2009 12:33 PM
रंजना said...
वाह ! बहुत ही सुंदर भाव और सुंदर अभिव्यक्ति.
January 20, 2009 2:28 PM
शोभा said...
तेरे शब्द मूर्त हों नाचें
मैं उस थिरकन में खो जाऊं
तेरी कविता की थपकी से
मेरे प्रियतम मैं सो जाऊं
अधर हिलें मैं प्राण वार दूं
यदि उनका हिलना एक छलावा.
अति सुन्दर
January 20, 2009 4:32 PM
रंजना [रंजू भाटिया] said...
सारी चाह हुई है विस्मृत
केवल एक अभिप्सित तू है
प्रेम-उदधि मेरे प्राणेश्वर
मेरा हृदय-नृपति तो तू है
प्रतिक्षण मिलन-गीत ही गाऊं
यदि तेरा मिलना एक छलावा.
यह छलावे ही छलते रहते हैं फ़िर ता उम्र दिल को बहलाना पढता है ,,बहुत सुंदर लगे इस रचना के भाव
January 20, 2009 5:13 PM
mehek said...
bahut sundar
January 20, 2009 5:24 PM
आशुतोष दुबे "सादिक" said...
January 20, 2009 9:48 PM
आशुतोष दुबे "सादिक" said...
aap mere blog ke follower bane hai,iske liye aapka dhanyawaad,aapka sneh aur sahyog isi tarah milta rahe.isi asha me hoon.
January 20, 2009 9:50 PM
अल्पना वर्मा said...
तेरे शब्द मूर्त हों नाचें
मैं उस थिरकन में खो जाऊं
तेरी कविता की थपकी से
मेरे प्रियतम मैं सो जाऊं
अधर हिलें मैं प्राण वार दूं
यदि उनका हिलना एक छलावा
-बहुत ही प्यारी सी अनुभूतियों को कविता का रूप दिया है--बहुत सुंदर!
January 23, 2009 11:49 PM